अधर पल्लव पे रख तुझको मै हरदम मुस्कुराती हूँ,
जहाँ देखूँ तेरी तस्वीर निगाहें छोड़ आती हूँ।
यदि दूर हूँ तुझसे तुझे ढूँढू जमाने में ,
गर संग बैठूं फिर जमाना भूल जाती हूँ।।
जहाँ देखूँ तेरी तस्वीर निगाहें छोड़ आती हूँ।
यदि दूर हूँ तुझसे तुझे ढूँढू जमाने में ,
गर संग बैठूं फिर जमाना भूल जाती हूँ।।